हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहनलाल बडोली को मिली बड़ी राहत कसौली कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहनलाल बडोली को मिली बड़ी राहत कसौली कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया

Satya Khabar Panchkula
हरियाणा BJP अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल को रेप केस में क्लीन चिट मिल गई है। कसौली कोर्ट ने आज दूसरी बार पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट (CR) को स्वीकार किया। कसौली की अदालत ने एफआईआर को रद्द करने के आदेश दिए हैं। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहनलाल बडोली को दूसरी बार कसौली कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बडोली और सिंगर रॉकी मित्तल के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के कसौली में दर्ज गैंगरेप मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट 12 मार्च 2025 को कसौली की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने पुलिस द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था।
पुलिस ने साक्ष्यों के अभाव में यह रिपोर्ट दाखिल की थी। जांच के दौरान पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से मना कर दिया था और पुलिस को होटल से कोई सीसीटीवी फुटेज या अन्य ठोस सबूत नहीं मिले थे।
जुलाई 2025 में सोलन की जिला एवं सत्र अदालत ने कसौली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और केस को फिर से सुनने का आदेश दिया। पीड़िता ने दलील दी थी कि कसौली कोर्ट ने उसका पक्ष सुने बिना ही क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी।
सोलन कोर्ट के आदेश के बाद कसौली कोर्ट को पीड़िता की आपत्तियों पर विचार करने और यह तय करने का निर्देश दिया गया था कि मामला बंद किया जाए या दोबारा जांच शुरू की जाए। इस मामले में पिछले दिनों अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज फैसला सुनाए जाने का दिन था। अदालत ने आज अपनी फैसले में क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामला बंद करने को तथा एफआईआर रद्द करने को कहा है।
यह मामला दिसंबर 2024 में दर्ज हुआ था, जिसमें दिल्ली की एक महिला ने आरोप लगाया था कि जुलाई 2023 में कसौली के एक होटल में उसके साथ गैंगरेप किया गया था।
फरवरी 2025 में पुलिस ने सबूतों की कमी के कारण क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। मार्च 2025 में कसौली कोर्ट ने मामले को बंद करने की मंजूरी दी। जुलाई 2025 में सोलन सत्र न्यायालय ने मामले को दोबारा खोलने का आदेश दिया था।दिसंबर 2025 में मामले की सुनवाई कसौली कोर्ट में फिर से शुरू हुई और कोर्ट पीड़िता के पक्ष को सुना था।